हरियाणा में 4 प्लेट चाउमीन के साथ 4 लड़के पकडे गए
हिन्दुस्तान में न जाने कितने तालिबान हैं.. हमारे यहाँ नौकरों से ज्यादा तो मालिक हैं.. यहाँ धर्मों के मालिक हैं. अधर्मों के मालिक हैं. गुंडों के मालिक हैं. हैं नेताओं के मालिक हैं. दबंगों के मालिक हैं. अपंगों के मालिक हैं. और इन सबका तो भगवान् ही मालिक है. वैसे भगवान् भी धरती पर इन लोगों के फुल कंट्रोल में रहते हैं. जैसा अरमान इनके दिल में आया वैसा फरमान इन्होने सुनाया. अब आप मानो या मानो.. उसे सुन कर हंसो.. या फिर मान कर उसमें फंसो ... ये तो आपकी मर्जी है. यहाँ फेसबुक में और इंटरनेट में बैठकर उनके खिलाफ लिखना और उसपर रिएक्ट करना आसान है. पर उनका क्या होगा. जो वहां रह रहे हैं.. बेचारे कल से चाऊमीन नहीं खा पाएंगे.
खाप के माई-बापों ने छुरी कांटे से चाऊमीन खाते खाते हार मान ली होगी. बड़े बड़े नेता जिनके सामने वोटों के लिए सर झुकाते हों वो चाऊमीन के लिए अपना सर झुका और नाक कटायें तो कैसे. छोटे छोटे लड़के उनके सामने चम्मच से ही चाऊमीन को सफाचट कर जाते हैं. वो बेचारे देखते रह जाते हैं.. तब उनको बचपन की बात याद आती है. " न खेलेंगे ... न खेलने देंगे." और फिर बुलाई जाती है सम्मान के लिए एक बैठक. फैसला लिया जाता है की चाऊमीन का बहिस्कार होना चाहिए. बिना कारन बहिस्कार तो बनता नहीं.. जो मामला गरम हो उससे जुड़े आरोप लगा देते हैं उसपर.
मुझे तो लगा था की जमीन घोटाले या फिर अपंगों या फिर कोयले से जुड़े घोटाले का आरोप जड़ कर चाऊमीन का बहिस्कार करेंगे.. खैर उन्होंने चाऊमीन पर जो आरोप जड़ा है वो तो चाऊमीन को सौस दिखाने लायक नहीं छोड़ा.
मेरे हिसाब से खापों की सीमा सीमित है मगर जुर्रत असीमित. खापों के बापों की भी हिम्मत नहीं की उनका कुछ बिगाड़ सकें.

khaane ko milta nahi aur jo khata hai use pakad liya jata hai.. Hindustan hai ya Taliban
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